यह जो मेरे हृदय के भग्नावशेष ,
तुम्हारी आँखो में प्रतिबिंबित हो रहे है ,
न जाने कितने पलों का इतिहास ,
स्वयं में समेटे हुए हैं ,
वे पल जिन्हें कोई जी ना पाया ,
जिनका उपयोग कोई ना कर पाया
सपनो के गठ्ठर स्वयं में समेटे हुए है ,
ये जो मेरे हृदय के .................
न जाने कितने शिल्पियों की कल्पनाएँ ,
इन पत्थरो के नीचे दबी पड़ी है ,
वे कल्पनाएँ जो मूर्त रूप ना ले पायी ,
जो मेरी सुप्त इच्छाओं से युद्धरत है ,
कि क्यों नकार दिया, तुमने,
अपने निर्माणकर्ता का कौशल ,
ऐसे विह्वल समायोजन से ,
स्वयं को लपेटे हुए है ,
ये जो मेरे हृदय के ..................
मुझमे और तुझमे अंतर मात्र इतना है ,
कि मेरे दिनों का रोजनामचा ,
तुम्हारे सामने खुला पड़ा है ,
पर तुमने अभी उसे खोला नहीं है ,
पर इतना तो निश्चित है ,
कि तुम भी मेरे जैसे अवश्य होवोगे ,
एक दिन तुम भी समय के गर्त में खोवोगे ,
तब मे करुँगा उपहास तुम्हारा ,
माँगूगा उन अजन्मे क्षणों का प्रतिकार ,
जो तुमने मुझसे छीने है ,
ये जो मेरे हृदय के .................
तुम्हारी आँखो में प्रतिबिंबित हो रहे है ,
न जाने कितने पलों का इतिहास ,
स्वयं में समेटे हुए हैं ,
वे पल जिन्हें कोई जी ना पाया ,
जिनका उपयोग कोई ना कर पाया
सपनो के गठ्ठर स्वयं में समेटे हुए है ,
ये जो मेरे हृदय के .................
न जाने कितने शिल्पियों की कल्पनाएँ ,
इन पत्थरो के नीचे दबी पड़ी है ,
वे कल्पनाएँ जो मूर्त रूप ना ले पायी ,
जो मेरी सुप्त इच्छाओं से युद्धरत है ,
कि क्यों नकार दिया, तुमने,
अपने निर्माणकर्ता का कौशल ,
ऐसे विह्वल समायोजन से ,
स्वयं को लपेटे हुए है ,
ये जो मेरे हृदय के ..................
मुझमे और तुझमे अंतर मात्र इतना है ,
कि मेरे दिनों का रोजनामचा ,
तुम्हारे सामने खुला पड़ा है ,
पर तुमने अभी उसे खोला नहीं है ,
पर इतना तो निश्चित है ,
कि तुम भी मेरे जैसे अवश्य होवोगे ,
एक दिन तुम भी समय के गर्त में खोवोगे ,
तब मे करुँगा उपहास तुम्हारा ,
माँगूगा उन अजन्मे क्षणों का प्रतिकार ,
जो तुमने मुझसे छीने है ,
ये जो मेरे हृदय के .................
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